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Category: एकटा छला गोनू झा



गोनू झा मृत्युशय्या पर छलाह | प्राण अब-तबमे रहनि | पूरा गाम उनटल रहय महापुरुषक महाप्रयाणक बेलामे | तखने गोनू झाकें कने होस अयलनि, बजलाह – ” भोनू! भोनू!! “ भोनू दौड़लाह हुनकर मुहँ लग – ” की कहे छी भाई? कोनो इच्छा? “ गोनू बजलाह – ” नहि, आब किछु नहि, गोदान करा दैह […]

गोनू झाक पंचौती

Posted on: Sunday, Jan 9, 2011

गोनू झाक प्रतीक्षा करैत – करैत पंडिताइनक आंखि पाथर भs गेलनि आ ओहि पाथर भेल आंखिमें निन्द आबs लग्लनि | पंडिताइन सोचैत रहलीह जे दुपहर राति भेलै मुदा आइ एखन धरि कतस छथि से नहि जानि | कहकिs गेल छलाह जे आइ कोनो काज नहि अछि, तुरंन्त घुरि आयब | मुदा ओ तुंरत पहाड़ भs […]

गोनू झाक कविता

Posted on: Saturday, Jan 8, 2011

मिथिलाक रजा कवि़क बड़ आदर करैत छलाह | जे कोनो कवि राजाक दरबारमे जाइत छलाह तथा अपन कवितासं राजाकें प्रसन्न कs दैत छलाह , हुनका बेस आदर – सत्कार होइत छलनि तथा दान – दक्षिणा सेहो भेटैत छलनि | एक समय गप्प थिक | कोनो गाममे दूटा गरीब ब्राह्मण रहैत छलाह | तें हुनका हरदम […]

गोनू झाक बरद

Posted on: Friday, Jan 7, 2011

गोनू झाक एक बेर माल – जालक हाट गेलाह तथा ओतs सं नीक बरद किनने अयलाह | पैसाक किल्लति रहिन तें एकटा किनलनि | सोचलनि जे पाइ होयत तं जोड़ा लगा लेब | एहि वर्ष ककरो संग भजैती कs लेब | यैह सभ सोचैत गोनू झा गाम दिस आबि रहल छलाह | कि तखने एक […]

एक समय गोनू झा मिथिलाक राजा ओहिठाम चाकरी करैत छलाह | एक दिन राजा अपन पिताक श्राद्ध कs दरबार पहुँचलाह तs गोनू झा पुछलथिन जे एहि करतेबतामे कतबा खर्च पड़ल | राजा कहलथिन जे लगभग दस हजार | एहिपर गोनू झा कहलथिन – ‘ कृपानिधान! हम वृद्ध भs चुकल छी तें अपनेक आज्ञा हो तs […]

गोनू झा पर गामक लोक बड़ कन्हुआयल रहैत छलाह | हुनकर उन्नतिसं लोककेँ ईर्ष्या होइत छलनि | हुनका लोकनिक सम्मिलित प्रयाससं गोनू आ भोनू दुनु भाइमे झगड़ा भs गेल | मुदा एकटा महींस आ कम्मल बचि गेल जे बँटा नहि सकल | एहि पंचैतीसं गोनू बड़ दुखित रहैत छलाह | महींसकें दिन भर खुअबैत – […]

गोनू झा आ सेठजी

Posted on: Tuesday, Jan 4, 2011

एक समय गोनू झा गरीबीक दिन काटि रहल छलाह | एकटा सेठसं ओ सय टाका कर्ज लेलनि | ओकर सुदि बढ़ैत गेल, जे हजार धरि ठेकि गेल | एक दिन सेठजीकें पता लगलनि जे गोनू झाक पुत्र विवाह भs रहल छानि | ओ सोचलनि जे ऐन मौका पर ओतs पहुँचल जाय | अपन इज्जति बचयबाक […]

गोनू झाक ढाकी

Posted on: Monday, Jan 3, 2011

कमला नदीक कछेड़मे पड़ैत रहनि गोनू झाक खेत | एक बेर कमलामे भीषण बाढ़ीआयल | सभक फसिल जलमगन भेल जा रहल छल | गोनू झाक सेहो जजाति कमला महारानीक गर्भमे जा रहल छलनि | ओ एक दिन नदीक कातमे गेलाह आ कsल जोडि प्रार्थना कयलनि जे जं एहि बाढ़ीसं हमार फसिल धान बचि गेल तं […]

गोनू झाक बंगौर

Posted on: Sunday, Jan 2, 2011

एक बेर गोनू झा बांगक खेती नीक जकाँ कयने रहथि | उपजा सेहो नीक भेलनि | ओकरा बेचि नीक पाइ सेहो अर्जित कयलनि | मुदा हुनका चिन्ता छलनि जे बांग तं बिका गेल मुदा बंगौरकें क्यो पुछनिहार नहि | ओ एही व्यथें मुइल जाइत छलाह जे हाटमे एकरा पुछनिहार नहि | ओ एही व्यथें मुइल […]

गोनू झा भोज कयलनि

Posted on: Sunday, Jan 2, 2011

जखन गोनू झा बृद्ध पिताक देहावसान भs गेलनि तs गौंआँ लोकनिकें प्रसन्नता भेलनि जे एकटा दमगर भोज पारि लागत | सरझप्पीक बाद गौंआँ सभ गोनू झाक दलान पर जुमैत गेलाह आ हुनक पिताक महानताक बखान करैत वृषोरत्सर्ग श्राद्धक संग असिद्ध भोज करबाक सुझाब देबs लगलथिन | बेर बेर – असिद्ध भोजक आग्रह करैत देखि गोनू […]

About Mithila

Mithila is an ancient cultural region of South Nepal and North India lying between the lower ranges of the Himalayas and the Ganges River. The Nepal border cuts across the top fringe of this region. The Gandak and Kosi Rivers are rough western and eastern boundaries of Mithila. The Ramayana records a dynastic marriage between Prince Rama of Ayodhya and Sita, the daughter of Raja Janak of Mithila. The town of Janakpur, in the northern Nepali section of Mithila, is believed to be Janak's old capital.
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