Posted on: Monday, Jan 10, 2011
गोनू झा मृत्युशय्या पर छलाह | प्राण अब-तबमे रहनि | पूरा गाम उनटल रहय महापुरुषक महाप्रयाणक बेलामे | तखने गोनू झाकें कने होस अयलनि, बजलाह – ” भोनू! भोनू!! “ भोनू दौड़लाह हुनकर मुहँ लग – ” की कहे छी भाई? कोनो इच्छा? “ गोनू बजलाह – ” नहि, आब किछु नहि, गोदान करा दैह [...]
Posted on: Sunday, Jan 9, 2011
गोनू झाक प्रतीक्षा करैत – करैत पंडिताइनक आंखि पाथर भs गेलनि आ ओहि पाथर भेल आंखिमें निन्द आबs लग्लनि | पंडिताइन सोचैत रहलीह जे दुपहर राति भेलै मुदा आइ एखन धरि कतस छथि से नहि जानि | कहकिs गेल छलाह जे आइ कोनो काज नहि अछि, तुरंन्त घुरि आयब | मुदा ओ तुंरत पहाड़ भs [...]
Posted on: Saturday, Jan 8, 2011
मिथिलाक रजा कवि़क बड़ आदर करैत छलाह | जे कोनो कवि राजाक दरबारमे जाइत छलाह तथा अपन कवितासं राजाकें प्रसन्न कs दैत छलाह , हुनका बेस आदर – सत्कार होइत छलनि तथा दान – दक्षिणा सेहो भेटैत छलनि | एक समय गप्प थिक | कोनो गाममे दूटा गरीब ब्राह्मण रहैत छलाह | तें हुनका हरदम [...]
Posted on: Friday, Jan 7, 2011
गोनू झाक एक बेर माल – जालक हाट गेलाह तथा ओतs सं नीक बरद किनने अयलाह | पैसाक किल्लति रहिन तें एकटा किनलनि | सोचलनि जे पाइ होयत तं जोड़ा लगा लेब | एहि वर्ष ककरो संग भजैती कs लेब | यैह सभ सोचैत गोनू झा गाम दिस आबि रहल छलाह | कि तखने एक [...]
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